Kauleshwari Hill is also Known as Kolhua Hill

कौलेश्वरी पहाड़

कौलेश्वरी पहाड़ : विदेश नहीं चतरा का है यह खूबसूरत नजारा झारखंड के चतरा जिले में निरंजना नदी के तट पर स्थित है कौलेश्वरी पर्वत। हंटरगंज ब्लॉक के 40.14 एकड़ में फैला यह क्षेत्र झारखंड के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन में शुमार हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बना रहा यह पर्वत हिंदू, जैन व बौद्ध धर्म का संगम माना जाता है। नवरात्र के अवसर पर पूरे इलाके के लोगों की आस्था यहां उमड़ती है। यहां हर साल चीन, बर्मा, थाईलैंड, श्रीलंका, ताइवान आदि देशों से काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। भू-तल से 1575 फीट ऊंचे इस पर्वत का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। पर्वत पर हरे-भरे मनोहारी वादियों के मध्य मां कौलेश्वरी मंदिर, शिव मंदिर, जैन मंदिर व बौध स्थल स्थित है। इनके इर्द-गिर्द स्थित तीन झीलनुमा तालाबों की नैसर्गिकता दिलकश नजारा पेश करती है।

सिद्धपीठ के रूप में चिह्नित है कौलेश्वरी - कौलेश्वरी सिद्धपीठ के रूप में चिन्हित है। इसका उल्लेख दुर्गा सप्तशती में मिलता है। इसमें कहा गया है-कुलो रक्षिते कुलेश्वरी। अर्थात कूल की रक्षा करने वाली कुलेश्वरी। किवदंती है कि श्रीराम, लक्ष्मण सीता ने वनवास काल में यहां समय व्यतीत किया था। यह भी मान्यता है कि कुंती ने अपने पांचों पुत्रों के साथ अज्ञातवास का काल यहीं बिताया था। यह भी कहा जाता है कि अर्जुन के बेटे अभिमन्यु का विवाह मत्स्य राज की पुत्री उत्तरा से यहीं हुआ था।

पार्श्वनाथ की तपोभूमि भी है कौलेश्वरी पहाड़ - जैनियों की मान्यता है की कौलेश्वरी 23 वे तीर्थकर पार्स्वनाथ व शीतलनाथ की तपोभूमि है | पर्वत के एक गुफा में छोटी छोटी पांच प्रतिमाये उत्कीर्णित है | इसे जैन धर्म के लोग पंच बालायती बताते है | सनातन धर्म के लोग इसे पांडव मानते है | इसी गुफा में एक अन्य स्थान पर दस प्रतिमाये उत्कीर्णित है | हिन्दू अनुयायी इसे दसावतार , जैनी दस तीर्थंकर एवं बौद्ध दस भिक्षु मानते है | पर्वत पर एक अन्य गुफा में भी एक प्रतिमा है | इसके सिर के उपर एक सर्प अपना फन फैलाये हुए है | इसे जैन अनुयायी भगवान् पार्श्वनाथ की प्रतिमा बताते है | हालाँकि हिन्दू अनुयायी इसे भैरवनाथ की प्रतिमा मानते है | अंग्रेज अफसर जएम स्टेन के अनुसार उक्त प्रतिमाये दिगम्बरी है और जैन समुदाय से जुडी है |

केशलुथन के लिए कौलेश्वरी सर्वोत्तम स्थल - कौलेश्वरी पहाड़ से बौद्ध धर्म के अनुयायी की भी आस्था जुडी है | प्रत्येक साल काफी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु पर्वत पर आते है | यहाँ मरवा मड़ई के पास बने वेदी के पास अपना बाल व नाख़ून जलाते है |इस कर्मकांड को वह केशलुथन कहते है | बौद्ध अपने जीवन कल में ही श्राद्धकर्म कर लेते है | इस कर्मकांड के लिए बौद्ध धर्म के लोग कौलेश्वरी को उत्तम मानते है | बौद्ध धर्म के लोगों में यह भी मान्यता है कि कौलेश्वरी पर्वत पर बौद्ध भिक्षु दिंगनाथ व नागार्जुन ने तपस्या की थी |

अंतराष्ट्रीय पहचान , पर पर्यटन स्थल घोषित नहीं - कौलेश्वरी भले ही अंतराष्ट्रीय पर्यटन क्षेत्र के रूप में चिन्हित है | लेकिन राज्य सरकार ने इसे अब तक पर्यटन स्थल घोषित नही किया है | इस सम्बन्ध में राज्य सरकार ने कई बार प्रस्ताव माँगा | प्रस्ताव भेजे भी गये | फिर भी बात आगे नही बढ़ी | पांच मार्च २०१० को कौलेश्वरी को वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव माँगा गया | नौ सितम्बर 2007 को आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने रास्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए प्रस्ताव माँगा | इससे पहले 31 अक्टूबर 2003 को कला संस्कृति , खेलकूद एवं युवा विभाग ने पुरातात्विक स्मारक घोषित करने के लिए प्रस्ताव माँगा था | पर्वत के पर्यटन क्षेत्र घोषित नही होने के कारण ही कौलेश्वरी का विकाश नही हो पाया है |



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