प्रधान मंत्री आवास योजना – ग्रामीण

स्वतंत्रता के तुरंत बाद शरणार्थियों के पुनर्वास के साथ देश में सार्वजनिक आवास कार्यक्रम शुरू किया गया और तब से अब तक गरीबी उपशमन के साधन के रूप में यह सरकार का प्रमुख फोकस क्षेत्र रहा है| जनवरी 1996 में एक स्वतंत्र कार्यक्रम के रूप में इंदिरा आवास योजना (आई ए वाई )नाम ग्रामीण आवास कार्यक्रम शुरू किया गया |यद्यपि आईएवाई ग्रामीण क्षेत्रों में मकान संबंधी जरूरतों को पूरा करती है फिर भी वर्ष 2014 में समवर्ती मूल्यांकन और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सी ए जी ) की निष्पादन लेखा-परीक्षा के दौरान कतिपय कमियों का पता चला था| यह कमियां अर्थात मकान की कमी का निर्धारण न कर पाना, लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता की कमी ,मकान की खराब गुणवत्ता और तकनीकी परिवर्तन की कमी, तालमेल का अभाव, लाभार्थियों को ऋण ना मिलना और निगरानी की कमजोर प्रणाली इस कार्यक्रम के प्रभाव और परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही थी|

ग्रामीण आवास कार्यक्रम में इन कमियों को दूर करने के लिए और 2022 तक “सभी को मकान” उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए इंदिरा आवास योजना का 1.4.2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण(पीएमजीवाई – जी ) में पुनर्गठित कर दिया गया है|

पीएमएवाई-जी का उद्देश्य सभी बेघर परिवारों और कच्चे तथा टूटे-फूटे मकानों में रहने वाले परिवारों को 2022 तक बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान उपलब्ध कराना है इसका का वर्तमान उद्देश्य 2016-17 से 2018- 19 तक 3 वर्षों में कच्चे टूटे-फूटे मकानों में रहने वाले एक करोड़ परिवारों को लाभ प्रदान करना है |साफ-सुथरे रसोईघर के साथ मकान के न्यूनतम आकार को बढ़ाकर 25 वर्ग मीटर कर दिया गया है| इकाई सहायता को मैदानी क्षेत्रों में ₹70000 से बढ़ाकर  ₹120000 तथा पर्वतीय राज्यों दुर्गम क्षेत्रों और आईएपी जिलों में ₹75000 से बढ़ाकर ₹130000 कर दिया गया है लाभार्थी मनरेगा से 90 से 95 दिनों की कुशल मजदूरी प्राप्त करने के हकदार हैं |शौचालय के निर्माण के लिए एसडीएम जी मनरेगा योजना या वित्तपोषण के किसी अन्य समर्पित स्रोत से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी| पाइप के जरिए पेयजल बिजली के कनेक्शन एलपीजी कनेक्शन इत्यादि के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के अंतर्गत तालमेल के भी प्रयास किए जाएंगे|

इकाई सहायता की लागत का वाहन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के आधार पर तथा पूर्वोत्तर एवं हिमालय राज्यों के लिए 90:10 के आधार पर किया जाएगा |पीएमएवाई जी के लिए निधियों की वार्षिक प्रावधान में से 95% निधियां राज्य संघ राज्य क्षेत्रों को पीएमएवाई जी के अंतर्गत नए मकानों के निर्माण के लिए रिलीज की जाएगी इसमें प्रशासनिक व्यय के लिए दिया गया 4% आवंटन भी शामिल होगा| बजट अनुदान की 5% राशि केंद्रीय स्तर पर विशेष परियोजनाओं के लिए आरक्षित निधि के रूप में रखी जाएगी |अधिकार प्राप्त समिति द्वारा अनुमोदित की गई वार्षिक कार्य योजना के आधार पर राज्यों को वार्षिक आवंटन किया जाएगा और राज्य सन क्षेत्रों को दो किस्तों में निधियां रिलीज की जाएगी|

लाभार्थियों का चयन पीएमएवाई जी के सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है| वास्तव में लाभ से वंचित लाभार्थियों को भी सहायता मिले और लाभार्थियों का चयन उद्देश्यपरक एवं जांच जाने योग्य हो, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए पीएमएवाई जी में BPL परिवारों में से लाभार्थी का चयन करने की बजाय सामाजिक आर्थिक और जाति आधारित जनगणना 2011 में उल्लेखित मकानों की कमी संबंधी मांगों का उपयोग करते हुए लाभार्थियों का चयन किया जाता है जिसकी ग्राम सभा द्वारा जांच की जाती है| एसइसीसी आकड़ो   में मकान से संबंधित विशिष्ट अपवर्जन को दर्ज किया जाता है| इसी आंकड़े का उपयोग करते हुए देखा था 0 1 और 2 कमरे की कथा दीवारों के मकानों में रहने वाले परिवारों को अलग किया जाता है और उन्हें लक्षित किया जाता है| स्थाई प्रतीक्षा सूची में यह भी सुनिश्चित होता है कि राज्य के पास आगामी वर्षों में योजना के अंतर्गत किए जाने के लिए परिवारों और तैयार सूची के माध्यम से ताकि क्रियान्वयन की बेहतर लर्निंग की जा सके लाभार्थी के चयन में शिकायतों को दूर करने के लिए एक अपील लिए प्रक्रिया भी बनाई गई है|

निर्माण की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय तकनीकी सहायता एजेंसी स्थापित किए जाने की परिकल्पना की गई है| अच्छे मकानों के निर्माण में एक बड़ी अड़चन थी कुशल राज मिस्त्रियों की कमी इस समस्या से निपटने के लिए राज्य क्षेत्रों में अखिल भारत अवसर पर राज्य में स्त्रियों का प्रशिक्षण एवं परमाणु कार्यक्रम शुरू किया गया है| अच्छा निर्माण सुनिश्चित होने के अलावा इससे ग्रामीण राज मिस्त्रियों के लिए अतिरिक्त आजीविका अर्जुन और करियर प्रोग्रेशन भी सुनिश्चित होगा समय पर निर्माण समापन और अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय स्तर के सरकारी गर्मी और ग्रामीण राजमिस्त्री के साथ पीएमएवाई जी लाभार्थी को टाइट करने की भी परिकल्पना की गई है|

लाभार्थी को उनके स्थानीय परिस्थितियों तथा आपदा रोधी विशेषताओं हेतु उपयुक्त आवास प्रारूप टाइपोलोजी का समूह प्रस्तुत किया जाएगा| प्रारूपों का विकास ग्रहण जन परामर्श प्रक्रिया द्वारा किया गया है| इस प्रयोग द्वारा लाभार्थी द्वारा निर्माण के आरंभिक चरणों में आधी निर्माण रोकना सुनिश्चित किया जा सकेगा जो की बहुधा अधूरे निर्माण या लाभार्थी को आवास निर्माण पूर्ण करने हेतु नगद ऋण लेने हेतु विवश करना है|

कार्यक्रम का क्रियान्वयन और उसकी निगरानी ई गवर्नेंस मॉडल आवास सॉफ्ट तथा आवास ऐप के माध्यम से * एंड की जाएगी आवास सॉफ्ट वर्क फ्लोर आधारित वेब आधारित इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवा प्रदाय का प्लेटफॉर्म है| जिसके माध्यम से लाभार्थी की पहचान से लेकर निर्माण से जुड़ी सहायता पी एफ एम एस के माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना के समस्त महत्वपूर्ण कार्य संपादित किए जाएंगे मकान के तारीख और टाइम टाइम पर तथा जियो रेफरेंस फोटोग्राफ के माध्यम से आधारित प्रगति की सही समय पर निगरानी करने के लिए आवास ऐप का उपयोग किया जाएगा यह दोनों ID एप्लीकेशन कार्यक्रम के क्रियान्वयन के दौरान लक्ष्यों की उपलब्धि में कमियों का निर्धारण करते हैं लिबर्टी के माध्यम से लाभार्थियों को सभी तरह का भुगतान आवास सॉफ्ट एमआईएस में लाभार्थियों के बैंक डाकघर खातों में किया जाना है|

राज्यों  ने अन्य सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल सहित पीएमएवाई जी कि अपनी-अपनी वार्षिक कार्य योजना तैयार करनी है |पीएमएवाई- जी के साथ तालमेल किए जाने वाले कार्यक्रम में जानकारी का सही समय पर सिस्टम तो सिस्टम अंतरण करके पीएमएवाई जी में तालमेल की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है|

इच्छुक लाभार्थी को संस्थानों से ₹70000 तक की निधियां उपलब्ध कराने में मदद की जाएगी जिसकी slb c और VLCC के माध्यम से निगरानी की जाएगी|

कार्यक्रम की न केवल इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बल्कि सामुदायिक भागीदारी सामाजिक लेखा परीक्षा संसद सदस्यों दिशा समिति केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों राष्ट्रीय स्तरीय निगरानी कविताओं के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी|

प्रधान मंत्री आवास योजना – ग्रामीण का अधिकारिक वेबसाइट – http://www.iay.nic.in/netiay/home.aspx